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अगर आप भी सोने से पहले देर तक देखते हैं स्क्रीन, तो जान लें सेहत पर क्या असर पड़ता है?

आज की डिजिटल दुनिया में, सोने से पहले स्मार्टफोन, टैबलेट या टेलीविजन देखना कई लोगों की दिनचर्या का एक हिस्सा बन चुका है। बिस्तर पर लेटे हुए सोशल मीडिया स्क्रॉल करना, कोई वेब सीरीज देखना या ई-मेल चेक करना एक आम आदत बन गई है। बहुत से लोग इसे आराम करने का एक तरीका मानते हैं, लेकिन वे इस बात से अनजान होते हैं कि यह आदत उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर कितना बुरा असर डाल सकती है। कई वैज्ञानिक शोधों से यह साबित हो चुका है कि स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी हमारे शरीर की जैविक घड़ी को प्रभावित करती है, जिससे नींद और सेहत से जुड़ी कई समस्याएं पैदा होती हैं। आइए इस लेख में जानते हैं कि देर रात तक स्क्रीन देखने की यह आदत आपके स्वास्थ्य के लिए क्यों हानिकारक है और इससे बचने के लिए आपको क्या करना चाहिए।
स्लिप साइकिल को बाधित करती है ‘ब्लू लाइट’
स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी हमारे शरीर की जैविक घड़ी को प्रभावित करती है। यह रोशनी दिमाग को संकेत देती है कि अभी दिन है, जिससे नींद के हार्मोन मेलाटोनिन का उत्पादन कम हो जाता है। मेलाटोनिन शरीर को सोने के लिए तैयार करता है, और जब इसका स्तर कम होता है, तो हमें नींद आने में दिक्कत होती है। इससे हमारा प्राकृतिक नींद-जागने का चक्र (स्लिप साइकिल) प्रभावित होता है, जिससे हमें रात में बेचैनी महसूस होती है और नींद आसानी से नहीं आती। सिर्फ नींद आने में देरी ही नहीं, बल्कि देर रात तक स्क्रीन देखने से नींद की गुणवत्ता भी खराब होती है। भले ही आप किसी तरह सो जाएं, लेकिन आपका दिमाग पूरी तरह से शांत नहीं हो पाता। इससे आपकी नींद बार-बार टूट सकती है और आप गहरी नींद के चरणों तक नहीं पहुंच पाते। परिणामस्वरूप, सुबह उठने पर आप थका हुआ, सुस्त और चिड़चिड़ा महसूस करते हैं। यह स्थिति एकाग्रता की कमी और दिन भर की प्रोडक्टिविटी को भी प्रभावित करती है।
स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी हमारे शरीर की जैविक घड़ी को प्रभावित करती है। यह रोशनी दिमाग को संकेत देती है कि अभी दिन है, जिससे नींद के हार्मोन मेलाटोनिन का उत्पादन कम हो जाता है। मेलाटोनिन शरीर को सोने के लिए तैयार करता है, और जब इसका स्तर कम होता है, तो हमें नींद आने में दिक्कत होती है। इससे हमारा प्राकृतिक नींद-जागने का चक्र (स्लिप साइकिल) प्रभावित होता है, जिससे हमें रात में बेचैनी महसूस होती है और नींद आसानी से नहीं आती। सिर्फ नींद आने में देरी ही नहीं, बल्कि देर रात तक स्क्रीन देखने से नींद की गुणवत्ता भी खराब होती है। भले ही आप किसी तरह सो जाएं, लेकिन आपका दिमाग पूरी तरह से शांत नहीं हो पाता। इससे आपकी नींद बार-बार टूट सकती है और आप गहरी नींद के चरणों तक नहीं पहुंच पाते। परिणामस्वरूप, सुबह उठने पर आप थका हुआ, सुस्त और चिड़चिड़ा महसूस करते हैं। यह स्थिति एकाग्रता की कमी और दिन भर की प्रोडक्टिविटी को भी प्रभावित करती है।
आंखों और मस्तिष्क पर बढ़ता है तनाव
सोने से ठीक पहले अंधेरे में स्क्रीन देखने से आंखों पर बहुत ज्यादा जोर पड़ता है। इससे आंखों में सूखापन, जलन और धुंधलापन जैसी समस्याएं हो सकती हैं, जिसे ‘डिजिटल आई स्ट्रेन’ कहते हैं। इसके अलावा, स्क्रीन से मिल रही लगातार जानकारी और सोशल मीडिया की तुलनात्मक पोस्ट मस्तिष्क पर तनाव डालती हैं, जिससे चिंता और मानसिक बेचैनी बढ़ सकती है।
सोने से ठीक पहले अंधेरे में स्क्रीन देखने से आंखों पर बहुत ज्यादा जोर पड़ता है। इससे आंखों में सूखापन, जलन और धुंधलापन जैसी समस्याएं हो सकती हैं, जिसे ‘डिजिटल आई स्ट्रेन’ कहते हैं। इसके अलावा, स्क्रीन से मिल रही लगातार जानकारी और सोशल मीडिया की तुलनात्मक पोस्ट मस्तिष्क पर तनाव डालती हैं, जिससे चिंता और मानसिक बेचैनी बढ़ सकती है।

लंबे समय तक खराब और अधूरी नींद लेने से शरीर में कई स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। नींद की कमी से भूख को नियंत्रित करने वाले हार्मोन (लेप्टिन और घ्रेलिन) का संतुलन बिगड़ जाता है, जिससे वजन बढ़ने का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा, लगातार कम नींद लेना हृदय रोग, टाइप 2 डायबिटीज और हाई ब्लडप्रेशर जैसी गंभीर बीमारियों के जोखिम को भी बढ़ा सकता है। इसलिए, अच्छी सेहत के लिए गहरी और पर्याप्त नींद लेना बहुत जरूरी है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।



