‘मोदी बाबा से फाइटर प्लेन चाहिए’, पीएम मोदी से मिलने के बाद एकनाथ शिंदे ने बताई पोते की फरमाइश

महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम और शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे बुधवार को अपने पूरे परिवार के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने दिल्ली पहुंचे। लेकिन इस मुलाकात की सबसे खास बात वह शख्स रहा जो वहां मौजूद नहीं था – उनका पांच साल का पोता रुद्रांश। पीएम मोदी से मुलाकात के बारे में बताते हुए एकनाथ शिंदे ने कहा- प्रधानमंत्री ने उनसे मिलते ही सबसे पहले रूद्रांश के बारे में पूछा। इस उन्होंने बताया कि वो अभी घर पर है और खेल रहा है। इस दौरान एकनाथ शिंदे ने पीएम मोदी को ये भी बताया कि – उनके पोते रुद्रांश ने उनसे एक खास फरमाइश की है। शिंदे ने बताया कि मेरे दिल्ली आने के दौरान उसने कहा – दादा, मोदी बाबा से मेरे लिए फाइटर प्लेन और खिलौने लेकर आना।’ यह सुनकर पीएम मोदी जोर से हंस पड़े। इस खास मुलाकात में शिंदे के साथ उनकी पत्नी लता शिंदे, सांसद बेटा श्रीकांत शिंदे, बहू वृशाली शिंदे शामिल थे। हालांकि रुद्रांश नहीं आया, लेकिन उसकी मौजूदगी हर बातचीत में महसूस की गई। इस खास मुलाकात में शिंदे के साथ उनकी पत्नी लता शिंदे, सांसद बेटा श्रीकांत शिंदे, बहू वृशाली शिंदे शामिल थे। हालांकि रुद्रांश नहीं आया, लेकिन उसकी मौजूदगी हर बातचीत में महसूस की गई।
शिंदे ने बताया कि काम आएगा फाइटर प्लेन
इसके बाद में मीडिया से बात करते हुए एकनाथ शिंदे ने कहा, ‘मेरे पोते ने सही मांग की है। फाइटर प्लेन हमारे लिए भी काम आ सकते हैं, खासकर महाराष्ट्र की राजनीति और आगामी नगर निगम चुनावों के लिए।’ उनके इस मजाकिया बयान से यह साफ हो गया कि वे चुनावी लड़ाई को भी फाइट की तरह देख रहे हैं। दिलचस्प बात ये है कि जब एकनाथ शिंदे पीएम मोदी से मिलने लोक कल्याण मार्ग पहुंचे, उसी समय उद्धव ठाकरे भी अपने परिवार के साथ दिल्ली में थे- बता दें कि उद्धव ठाकरे विपक्षी इंडिया गठबंधन की बैठक में शामिल होने के लिए पहुंचे हैं। इस पर तंज कसते हुए शिंदे बोले, ‘वो 10 जनपथ गए हैं और हम लोक कल्याण मार्ग पर आए हैं, जैसा कि बालासाहेब ठाकरे ने हमें सिखाया था।’
मोदी को दिया भगवान शंकर का चित्र
इस दौरान एकनाथ शिंदे ने पीएम मोदी को भगवान शंकर का चित्र भेंट किया। उन्होंने इसे ‘ऑपरेशन महादेव’ की सफलता के उपलक्ष्य में सौंपा- जम्मू-कश्मीर में हुआ यह आतंकवाद विरोधी ऑपरेशन, जिसमें पहलगाम हत्याकांड में शामिल एक आतंकी मारा गया। जब पत्रकारों ने उनसे ऑपरेशन टाइगर (जो शिवसेना उद्धव गुट को कमजोर करने की साजिश माना गया था) के बारे में पूछा तो उन्होंने मुस्कराते हुए जवाब दिया- ‘अभी हम ऑपरेशन सिंदूर और ऑपरेशन महादेव की बात कर रहे हैं, ना कि ऑपरेशन टाइगर की।’



