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भारत ने संयुक्त राष्ट्र के बाद कॉमनवेल्थ में सुधार की मांग की, कहा- आज की सच्चाई से दूर है संगठन

भारत ने राष्ट्रमंडल समूह (कॉमनवेल्थ) में सुधारों पर जोर दिया है, ताकि यह मौजूदा समय की वास्तविकताओं को प्रतिबिंबित कर सके। संयुक्त राष्ट्र महासभा (यूएनजीए) के इतर आयोजित मंत्री स्तर की बैठक में भारत ने समूह के मूल्यों और सिद्धांतों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता जताई। कॉमनवेल्थ के विदेश मामलों के मंत्रियों की बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व विदेश मंत्रालय (एमईए) के सचिव (पश्चिम) राजदूत सिबी जॉर्ज ने किया।  विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को एक सोशल मीडिया पोस्ट में बताया कि बैठक में जॉर्ज ने कॉमनवेल्थ चार्टर में निहित मूल्यों और सिद्धांतों के प्रति भारत की प्रतिबद्धता व कॉमनवेल्थ में सुधार की जरूरत पर बात की, ताकि मौजूदा समय की वास्तविकताओं को ठीक से प्रतिबिंबित किया जा सके। इस बैठक की अध्यक्षता समोआ के उप प्रधानमंत्री टोएलुपे माओइआउतेले पोमुलिनुकु ओनेसेमो ने की। कॉमनवेल्थ के विदेश मामलों के विदेश मंत्रियों की बैठक (सीएफएएमएम) एक उच्च स्तरीय मंच है, जो कॉमनवेल्थ के सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों को एक साथ लाता है, ताकि आपसी सहयोग को मजबूत करने और 56 देशों के इस संगठन की साझा चुनौतियों का मिलकर समाधान निकालने के तरीकों पर चर्चा कर सकें।  बैठक में मंत्रियों ने कहा कि कॉमनवेल्थ बहुपक्षवाद और सामूहिक कार्रवाई का एक मजबूत समर्थक है, खासकर ऐसे समय में जब दुनिया गहरे संकट में है। अपने संबोधन की शुरुआत में टोएलुपे ने कहा कि इस बैठक में उनकी भूमिका अहम है और आज जिन मुद्दों पर चर्चा हो रही है, वे समोआ में आयोजित कॉमनवेल्थ के राष्ट्राध्यक्षों की बैठक में लिए गए फैसलों को लागू करने के लिए जरूरी हैं, ताकि कॉमनवेल्थ को मजबूत बनाया जा सके।
उन्होंने कहा कि बहुपक्षीय प्रणाली पर गंभीर दबाव है, लेकिन यह अभी भी सबसे बड़ा उपकरण है। इसके बिना विश्व में दरारे गहराती जाएंगी, लेकिन इसके साथ हम समाधान ढूंढ सकते हैं। एक दबाव से भरी दुनिया में कॉमनवेल्थ के स्पष्ट उद्दश्य परिभाषित होने चाहिए।

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