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नहीं ठीक हो रही एंग्जाइटी तो तुरंत दिखाएं डॉक्टर को, कहीं ये ब्रेन ट्यूमर तो नहीं?

मानसिक स्वास्थ्य की समस्याएं मौजूदा समय में वैश्विक स्तर पर सबसे तेजी से बढ़ती चिंता बनी हुई हैं। किशोरों से लेकर बुजुर्गों तक, सभी उम्र के लोगों में स्ट्रेस-एंग्जाइटी से लेकर डिप्रेशन तक के मामले रिपोर्ट किए जा रहे हैं। कई अध्ययनों से स्पष्ट होता है कि मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य एक दूसरे से जुड़े होते हैं, जिसका मतलब है कि मानसिक विकारों का असर शारीरिक स्वास्थ्य और इसी तरह से शारीरिक समस्याओं का असर मेंटल हेल्थ को प्रभावित कर सकता है। यही कारण कि सभी लोगों को मानसिक और शारीरिक दोनों सेहत को ठीक रखने पर गंभीरता से ध्यान देते रहना चाहिए। आंकड़ों से पता चलता है कि आज के समय में एंग्जाइटी यानी चिंता की समस्या युवाओं में बहुत तेजी से बढ़ती जा रही है। पहले जहां इसे सामान्य तनाव या चिंता समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता था, अब विशेषज्ञ मानते हैं कि यह सिर्फ मानसिक स्थिति नहीं, बल्कि कई बार गंभीर मानसिक स्वास्थ्य समस्या और कुछ मामलों में मस्तिष्क से संबंधित जानलेवा बीमारियों का कारण भी बन सकती है। दुनियाभर में मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के बारे में लोगों को शिक्षित करने, जागरूकता बढ़ाने और मानसिक स्वास्थय में सुधार के प्रयासों को गति प्रदान करने के उद्देश्य से हर साल 10 अक्तूबर को विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस मनाया जाता है।  स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, बार-बार होने वाली एंग्जाइटी की समस्या पर गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत होती है। अध्ययनों से पता चलता है कि ये दिक्कत कुछ स्थितियों में ब्रेन में ट्यूमर की समस्या का संकेत हो सकता है, जोकि जानलेवा भी हो सकती है।

Brain Tumour Symptoms anxiety can also be a sign of brain tumor Know How to Identify and Prevention Tips
बार-बार एंग्जाइटी होना मस्तिष्क समस्याओं का संकेत

अध्ययनकर्ताओं की एक टीम ने सभी लोगों को अलर्ट किया है कि अगर आप भी बार-बार एंग्जाइटी से परेशान रहते हैं इसके साथ चक्कर आने और थकान की दिक्कत भी बनी रहती है तो इसपर गंभीरता से ध्यान दीजिए, ये ब्रेन ट्यूमर का भी संकेत हो सकता है। वैसे तो ये सभी लक्षण मानसिक स्वास्थ्य की समस्याओं में देखे जाते रहे हैं पर अगर ये आपको अक्सर परेशान कर रही है तो सावधान हो जाइए, कहीं ये ब्रेन ट्यूमर का संकेत न हो। शोधकर्ताओं ने बताया, वेस्टिबुलर श्वानोमा एक प्रकार का नॉन-कैंसर ब्रेन ट्यूमर होता है, इसे एकॉस्टिक न्यूरोमा के नाम से भी जाना जाता है। इस प्रकार का ट्यूमर आमतौर पर कई वर्षों में धीरे-धीरे बढ़ता है और सुनने और संतुलन के लिए जिम्मेदार तंत्रिकाओं को प्रभावित करता है, जिससे सुनने की समस्या, टिनिटस और चक्कर आने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।  एंग्जाइटी की समस्या में भी ऐसे लक्षण हो सकते हैं। जामा ओटोलरींगोलॉजी में प्रकाशित एक हालिया रिपोर्ट में शोधकर्ताओं ने बताया कि एंग्जाइटी होने की समस्या को अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए। एंग्जाइटी की हिस्ट्री वाले रोगी ब्रेन ट्यूमर से संबंधित अन्य लक्षणों के प्रति अधिक संवेदनशील पाए गए हैं। इस लिंक को समझने लिए वाशिंगटन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने 109 वयस्कों के डेटा का विश्लेषण किया, जिनमें जून 2004 से जनवरी 2025 के बीच ब्रेन ट्यूमर का निदान किया गया था। प्रतिभागियों से उनके चिंता विकारों के बारे में भी पूछा गया। शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन लोगों में चिंता विकार यानी एंग्जाइटी का जोखिम अधिक था उनमें बाद के समय में ब्रेन ट्यूमर होने का खतरा अधिक था।

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क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

न्यूरोटोलॉजी के विशेषज्ञ और अध्ययन के प्रमुख लेखक टायलर विल्सन कहते हैं, वेस्टिबुलर सिस्टम को प्रभावित करने वाली बीमारी वाले रोगियों में मनोवैज्ञानिक संकट का खतरा अधिक देखा गया है। इस अध्ययन में ब्रेन ट्यूमर और चिंता विकारों के बीच संबंध की पहचान की गई है। एंग्जाइटी सिर्फ अस्थायी बेचैनी नहीं है। लगातार बढ़ती हुई चिंता शरीर और दिमाग दोनों पर गहरा असर डालती है। यह नींद की कमी, दिल की धड़कन बढ़ना, थकान, ध्यान न लगना जैसी कई दिक्कतें पैदा कर सकती है। लंबे समय तक इसे नजरअंदाज करने से इसका मस्तिष्क स्वास्थ्य पर भी असर देखा गया है।
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