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श्रीलंका में सजा गीता महोत्सव 2025, भारतीय संस्कृति का शानदार प्रदर्शन

सीताराम मेवाती

कोलंबो स्थित भारतीय उच्चायोग के सांस्कृतिक प्रकोष्ठ, स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक केंद्र (SVCC) द्वारा आयोजित गीता महोत्सव 2025 का 9 दिसंबर को यूनिवर्सिटी ऑफ विजुअल एंड परफॉर्मिंग आर्ट्स के पनिभारथा थियेटर में श्रद्धा और कलात्मक गरिमा के साथ आयोजन किया गया।

  महोत्सव का संयुक्त उद्घाटन भारत के श्रीलंका स्थित उप उच्चायुक्त डॉ. सत्यांजल पांडे और विश्वविद्यालय के उप-कुलपति प्रो. रोहन नेथसिंगे ने किया। इसके साथ भगवद्गीता की प्रेरणा से जुड़े भारतीय और श्रीलंकाई शास्त्रीय कला रूपों से सजी सांस्कृतिक संध्या की शुरुआत हुई।

  कार्यक्रम की शुरुआत डॉ. रविबंधु विद्यापथि के नेतृत्व वाले रविबंधु समंथी डांस एन्सेम्बल द्वारा प्रस्तुत ऊर्जावान कैंडियन नृत्य से हुई। महाभारत पर आधारित इस प्रस्तुति में श्रीलंका की पारंपरिक कैंडियन नृत्य शैली की लय, सौंदर्य और सांस्कृतिक गहराई को प्रभावशाली रूप में दिखाया गया।

  इसके बाद नाट्य कला मंदिर के शिष्यों ने कलासूरि श्रीमती वासुगी जगथीस्वरन के निर्देशन में भरतनाट्यम की सुंदर प्रस्तुति दी। उनके नृत्य कार्यक्रम में नृत्यांजलि, वर्णम, गीता उपदेशम और तिल्लाना शामिल थे, जो भक्ति, कथा-कौशल और भारतीय शास्त्रीय नृत्य की आध्यात्मिक अनुभूति को दर्शाते थे।

  अंतिम प्रस्तुति स्वामी विपुलानंद इंस्टिट्यूट ऑफ एस्थेटिक स्टडीज, ईस्टर्न यूनिवर्सिटी, बाटिकलोआ के छात्रों द्वारा दी गई। उनकी थीम आधारित प्रस्तुति ‘याधव माधव’ में भगवान कृष्ण की लीला, ज्ञान और करुणा को अभिव्यक्ति पूर्ण शैली और उत्कृष्ट शास्त्रीय तकनीक के साथ प्रस्तुत किया गया।

  कार्यक्रम को अत्यंत सराहना मिली। यह आयोजन भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और गीता के शाश्वत संदेश—धर्म, समरसता और आध्यात्मिक जागरण—को उजागर करता है, साथ ही भारत और श्रीलंका के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान और कलात्मक उत्कृष्टता का मजबूत प्रतीक भी बना।

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