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एक चूक से पेंशन से संपत्ति और क्रेडिट स्कोर तक, ये सब हो सकते हैं प्रभावित

जब आप किसी के लोन पेपर पर गारंटर के तौर पर दस्तखत करते हैं, तो आप सिर्फ गवाही नहीं देते, बल्कि कानूनी तौर पर कर्ज को अपने सिर पर लेते हैं। सेवानिवृत्त व्यक्तियों के लिए यह जोखिम और भी बड़ा है, क्योंकि उनके पास आय के सीमित साधन होते हैं। आइए समझते हैं गारंटर बनना आपके भविष्य के लिए कैसे भारी पड़ सकता है…

जिम्मेदारी आपकी, लाभ किसी और का
ऋण का गारंटर बनने का सीधा मतलब यह है कि यदि असली कर्जदार पैसा नहीं चुका पाता, तो उस पूरे धन की वसूली आपसे की जाएगी। बैंक को इससे कोई मतलब नहीं कि आपने वह पैसा इस्तेमाल किया है या नहीं। यदि कर्जदार भाग गया या मुकर गया, तो बैंक आपके दरवाजे पर दस्तक देगा। आपकी पेंशन, जमा पूंजी और यहां तक कि घर भी इस वसूली की चपेट में आ सकता है।

कानूनी पचड़े और मानसिक तनाव
उम्र के इस पड़ाव पर जब व्यक्ति को शांति और अच्छे स्वास्थ्य की जरूरत होती है, तब अदालती नोटिस और वसूली एजेंटों के चक्कर आपको मानसिक रूप से तोड़ सकते हैं।
कानूनी कार्रवाई: बैंक आपके विरुद्ध मुकदमा चला सकता है।
रिश्तों में खटास: पैसे का लेनदेन बड़े-बड़े रिश्तों में दरार डाल देता है। जिस अपने की मदद के लिए आप गारंटर बने थे, वही व्यक्ति विवाद होने पर आपका सबसे बड़ा शत्रु बन सकता है।  बुढ़ापे में बीमारियां और आकस्मिक खर्चे कभी भी बताकर नहीं आते। यदि आपकी पूंजी का बड़ा हिस्सा किसी और का कर्ज चुकाने में चला गया, तो आप अपनी स्वयं की चिकित्सा और आपात स्थिति के लिए दूसरों पर निर्भर हो जाएंगे। कभी भी केवल मौखिक भरोसे पर दस्तखत न करें। नियम और शर्तों को बारीकी से समझें। गारंटर बनने के बजाय कर्जदार को बीमा कराने की सलाह दें, ताकि उसकी अनुपस्थिति में बीमा कंपनी कर्ज का बोझ उठाए। मदद करना धर्म है, लेकिन अपनी आर्थिक सुरक्षा की बलि देकर नहीं। यदि आपका मन गवाही नहीं दे रहा, तो विनम्रता से ‘ना’ कहें।

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