Latest newsUncategorized

अन्ना हजारे के दस्तावेज को संग्रहालय में संरक्षित किया जाएगा, टीम पैतृक गांव पहुंची

नई दिल्ली स्थित प्रधानमंत्री संग्रहालय एवं पुस्तकालय (पीएमएमएल) में कार्यकर्ता अन्ना हजारे से जुडें पत्रों और दस्तावेजों को संरक्षित किया जाएगा। उनके करीबी सहयोगी ने बताया कि सामाजिक सुधारों, ग्रामीण विकास और भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलनों, जिनमें 2011 का लोकपाल आंदोलन भी शामिल है।  इसमें हजारे की योगदान को मान्यता देते हुए यह कदम उठाया जा रहा है। हजारे के सहयोगी दत्ता अवारी ने बुधवार को दावा किया कि नीरज कुमार और जितुमणि शर्मा के नेतृत्व में पीएमएमएल की एक टीम उनकी पैतृक गांव महाराष्ट्र के रालेगन सिद्धि में प्रक्रिया शुरू करने के लिए पहुंची। जिन दस्तावेजों को संग्रहित किया जाना है उनमें हजारे के सामाजिक कार्यों, नई दिल्ली में हुए ऐतिहासिक 2011 के लोकपाल आंदोलन, ग्राम विकास पहलों, जल संरक्षण प्रयासों और भ्रष्टाचार विरोधी अभियानों से संबंधित सामग्री शामिल है। उन्होंने बताया कि इन्हें ऐतिहासिक और अकादमिक शोध के लिए पीएमएमएल अभिलेखागार में संरक्षित किया जाएगा।

हजारे ने कई आंदोलनों का नेतृत्व किया

अन्ना हजारे सेना से कार्यकर्ता बने। 80 वर्ष से अधिक आयु के इस शख्स ने वर्षों से ग्रामीण विकास को बढ़ावा देने, सरकारी कामकाज में पारदर्शिता बढ़ाने और है। उन्हें भारत के तीसरे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार पद्म भूषण से सम्मानित किया गया है। पीएमएमएल अधिकारियों के हवाले से जारी एक विज्ञप्ति में कहा गया है कि लोकपाल आंदोलन के नेतृत्व और ग्रामीण विकास तथा भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में उनके लंबे समय के कार्यों को देखते हुए हजारे के दस्तावेजों का महत्वपूर्ण शैक्षणिक और ऐतिहासिक महत्व होने की उम्मीद है। पीएमएमएल एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्यातिप्राप्त स्वायत्त शैक्षणिक संस्थान है, जो आधुनिक और समकालीन भारतीय इतिहास पर शोध करता है। इसके अभिलेखागार में एआईसीसी, जनता पार्टी, डीएवी कॉलेज ट्रस्ट और मैनेजमेंट सोसाइटी जैसे संगठनों के संस्थागत संग्रह और जवाहरलाल नेहरू, महात्मा गांधी, श्यामा प्रसाद मुखर्जी, चरण सिंह, चंद्रशेखर और जयप्रकाश नारायण सहित कई प्रख्यात हस्तियों के व्यक्तिगत दस्तावेज मौजूद हैं। विज्ञप्ति के अनुसार, अभिलेखागार में मुख्य रूप से प्रमुख हस्तियों के मूल पत्र-व्यवहार, डायरी, अप्रकाशित दस्तावेज, नोट्स, भाषण और लेख शामिल हैं। संस्था विद्वानों के लिए अभिलेखीय सामग्री को सुलभ बनाने के लिए एक व्यापक डिजिटलीकरण परियोजना भी चला रही है।

Related Articles

Back to top button