33वें महाशिवरात्रि उत्सव में भव्य भारत भूषण अवॉर्ड की शुरुआत, राजनाथ सिंह ने किया सम्मानित

महाशिवरात्रि के मौके पर तमिलनाडु के कोयंबटूर स्थित ईशा योग केंद्र में 33वें महाशिवरात्रि उत्सव का भव्य आयोजन किया गया। आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु के नेतृत्व में होने वाला यह कार्यक्रम देश-विदेश में देखे जाने वाले बड़े आध्यात्मिक आयोजनों में गिना जाता है। इस वर्ष के उत्सव में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी शामिल हुए। रातभर चलने वाले इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी दर्ज की गई। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने महाशिवरात्रि के अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए बताया कि वह ईशा योग केंद्र के समारोह में शामिल होने को लेकर उत्साहित हैं। तय कार्यक्रम के अनुसार वह शाम करीब 4:15 बजे कोयंबटूर पहुंचे और वहां से हेलीकॉप्टर के जरिए ईशा योग केंद्र गए। कार्यक्रम में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, केंद्रीय राज्य मंत्री एल. मुरुगन और अन्य गणमान्य लोगों की मौजूदगी भी दर्ज की गई। आयोजन को राष्ट्रीय स्तर की अहम आध्यात्मिक सभा के रूप में देखा जा रहा है।
सधगुरु ने शुरू किया ‘भव्य भारत भूषण अवॉर्ड’
ईशा फाउंडेशन के संस्थापक और आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु जग्गी वासुदेव ने भव्य भारत भूषण अवॉर्ड की शुरुआत की है। इस पुरस्कार के माध्यम से राष्ट्रीय सुरक्षा, व्यवसाय, कला और मनोरंजन, खेल, समाज कल्याण, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, तथा साहित्य और शिक्षा जैसे विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तियों को सम्मानित किया जाएगा। सधगुरु ने कहा कि इस अवॉर्ड का उद्देश्य समाज में प्रेरणा फैलाना और उन लोगों की सराहना करना है जिन्होंने अपने क्षेत्र में असाधारण उपलब्धियां हासिल की हैं।
शिव सत्य और अनंत के प्रतीक- राजनाथ सिंह
तमिलनाडु में महाशिवरात्रि समारोह के अवसर पर आदियोगी प्रतिमा के सामने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि इस पावन मौके पर यहां उपस्थित होना उनके जीवन का विशेष और आध्यात्मिक अनुभव है। उन्होंने आदियोगी शिव को नमन करते हुए सभी भक्तों को शुभकामनाएं दीं। राजनाथ सिंह ने कहा कि भगवान शिव आदि, अनंत और शाश्वत हैं। जो सत्य है वही शिव है। उन्होंने वेल्लियांगिरी पहाड़ियों को दक्षिण का कैलाश बताते हुए इसे भगवान शिव का पवित्र धाम बताया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत के अंतरिक्ष मिशन (चंद्रयान, मंगलयान और आदित्य-L1) सिर्फ तकनीकी उपलब्धियां नहीं हैं, बल्कि हमारे प्राचीन वैज्ञानिक दृष्टिकोण की आधुनिक अभिव्यक्ति हैं। उन्होंने यह बात कोयंबटूर स्थित ईशा फाउंडेशन में महाशिवरात्रि समारोह के उद्घाटन अवसर पर कही, जिसका नेतृत्व सद्गुरु करते हैं। रक्षा मंत्री ने कहा कि सूर्य और चंद्रमा केवल खगोलीय पिंड नहीं, बल्कि हमारे पंचांग, व्रत-त्योहार और शुभ मुहूर्त की गणना का आधार हैं। उन्होंने कहा हमारे पर्व और अनुष्ठान सटीक गणनाओं पर आधारित हैं। आज जब भारत चंद्रयान या आदित्य-L1 जैसे मिशन लॉन्च करता है, तो वह परंपरा और तकनीक के संगम को आगे बढ़ाता है। उन्होंने जोड़ा जब हम अंतरिक्ष में उपग्रह भेजते हैं, तो साथ ही अपनी वैज्ञानिक संस्कृति को भी सुदृढ़ करते हैं।
राष्ट्रीय सुरक्षा पर बोलते हुए सिंह ने कहा कि इसे अक्सर हथियारों, तकनीक और सैनिकों की ताकत से जोड़ा जाता है, जो निस्संदेह महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि लेकिन स्थायी सुरक्षा केवल बाहरी शक्ति से नहीं आती। असली सुरक्षा सशक्त राष्ट्रीय चेतना से मिलती है। भयभीत समाज दीर्घकाल में सुरक्षित नहीं रह सकता; निडर समाज ही मजबूत राष्ट्र बनाता है। उनके अनुसार, यह निडरता केवल शारीरिक बल से नहीं, बल्कि आध्यात्मिक शक्ति से आती है। उन्होंने कहा कि संकट के समय हमारे सैनिक ‘शिवभाव’ के साथ मानवीय सहायता देते हैं और आवश्यकता पड़ने पर ‘रुद्र’ की तीव्रता के साथ ऑपरेशन अंजाम देते हैं। कार्यक्रम में भव्य भारत भूषण पुरस्कारों का भी उल्लेख हुआ, जो पहली बार समाज में उत्कृष्ट योगदान देने वाले व्यक्तियों को सम्मानित करने के लिए स्थापित किए गए हैं। रक्षा मंत्री ने बताया कि हालिया ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के लिए वायु, थल और नौसेना की तीन प्रमुख कमानों (वेस्टर्न एयर कमांड, सदर्न नेवल कमांड और वेस्टर्न नेवल कमांड) को भी सम्मानित किया गया। उन्होंने कहा कि यह उनके लिए गर्व और संतोष का क्षण था। रक्षा मंत्री ने कहा कि भारत में संस्कृति और विज्ञान को अलग-अलग नहीं देखा जा सकता। उन्होंने कहा संस्कृति केवल अनुष्ठानों का समूह नहीं, बल्कि हमारा जीवन-दर्शन है।



