गणित में संघर्ष कर रहे बच्चों में गलती से सीखने की आदत भी कमजोर, अध्ययन ने खोला राज

मेहनत के बावजूद अगर कोई बच्चा बार-बार गणित में पिछड़ रहा है, तो इसकी वजह केवल अंकों की कमजोर समझ नहीं हो सकती। स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के नए न्यूरोसाइंस अध्ययन में सामने आया है कि ऐसे बच्चों में अक्सर गलती से सीखने और अपनी रणनीति बदलने की क्षमता कमजोर होती है। शोधकर्ताओं का कहना है कि यही मानसिक आदत बच्चों की गणितीय प्रगति में सबसे बड़ी रुकावट बनती है। यह अध्ययन सोसाइटी फॉर न्यूरोसाइंस द्वारा साझा किया गया है और प्रतिष्ठित पीयर-रिव्यू जर्नल जे-न्यूरोसाइ में प्रकाशित हुआ है। स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की शोधकर्ता हायसांग चांग के नेतृत्व में किए गए इस शोध में बच्चों की सोचने की प्रक्रिया और दिमागी गतिविधियों का गहराई से विश्लेषण किया गया। अब तक आम धारणा यही रही है कि गणित में कमजोर बच्चे संख्याओं को ठीक से नहीं समझ पाते लेकिन इस अध्ययन ने बताया कि असली समस्या कई मामलों में इससे अलग है। शोध का उद्देश्य यह समझना था कि बच्चे समय के साथ कैसे सीखते हैं और क्या वे अपनी गलतियों से रणनीति सुधार पाते हैं। अध्ययन के दौरान बच्चों को सरल तुलना वाले सवाल दिए गए। हर बार उन्हें तय करना होता था कि दो में से कौन-सी मात्रा बड़ी है। कुछ सवालों में लिखे हुए अंक दिखाए गए, जैसे 4 और 7। वहीं कुछ मामलों में डॉट्स के समूह दिखाकर अनुमान लगाने को कहा गया कि किस समूह में ज्यादा बिंदु हैं। इस तरह शोधकर्ताओं ने प्रतीकात्मक संख्या समझ और मूल मात्रा पहचान दोनों की जांच की। साथ ही एक गणितीय मॉडल के जरिये यह देखा गया कि कई प्रयासों के दौरान बच्चों का प्रदर्शन कैसे बदलता है और वे गलती के बाद अपना तरीका सुधारते हैं या नहीं।



