शेफ की पहचान और सम्मान ही उनकी सबसे बड़ी पूंजी: संजीव कपूर

सीताराम मेवाती – मुंबई
प्रख्यात सेलिब्रिटी शेफ और पद्मश्री सम्मान से सम्मानित संजीव कपूर का मानना है कि किसी भी शेफ के लिए उसकी पहचान, सम्मान और पेशेवर प्रतिष्ठा किसी भी आर्थिक पारिश्रमिक से कहीं अधिक महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने कहा कि पाक कला के क्षेत्र में कार्यरत पेशेवरों को उनकी विशेषज्ञता और योगदान के अनुरूप सम्मान मिलना चाहिए।
संजीव कपूर ने यह विचार पत्रकार एवं लेखक वीर सांघवी के पॉडकास्ट कुलिनरी कल्चर में व्यक्त किए, जहां उन्होंने अपने लंबे और सफल करियर के कई महत्वपूर्ण अनुभव साझा किए। बातचीत के दौरान उन्होंने मास्टरशेफ इंडिया से जुड़ा एक दिलचस्प प्रसंग भी बताया।
कपूर ने खुलासा किया कि उन्हें मास्टरशेफ इंडिया के पहले सीजन का हिस्सा बनने का प्रस्ताव मिला था, लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार नहीं किया। इसकी वजह निर्माताओं द्वारा उनकी एक शर्त को स्वीकार न करना थी। कपूर के अनुसार, उन्होंने अभिनेता अक्षय कुमार से एक रुपये अधिक पारिश्रमिक की मांग की थी, जो उस समय शो से जुड़े हुए थे।
हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मांग धनराशि के लिए नहीं थी, बल्कि एक सिद्धांत और पेशेवर पहचान का प्रश्न था। मुंबई तरंग से विशेष बातचीत में कपूर ने कहा, “शेफ की पहचान सर्वोपरि है।” उन्होंने कहा कि शेफ केवल भोजन तैयार करने वाले पेशेवर नहीं होते, बल्कि वे पाक विरासत के संरक्षक, उत्कृष्ट भोजन अनुभवों के शिल्पकार और संस्कृति के सशक्त राजदूत भी होते हैं।
संजीव कपूर ने आगे कहा कि शेफ समुदाय के योगदान को उचित सम्मान और मान्यता मिलना आवश्यक है। बाद में निर्माताओं के साथ दोबारा बातचीत होने पर वे मास्टरशेफ इंडिया के तीसरे सीज़न से जुड़े। संजीव कपूर की यह सोच आज के युवा और उभरते शेफों के लिए प्रेरणास्रोत है। उनका मानना है कि सफलता के साथ-साथ सम्मान, विश्वसनीयता और पेशेवर पहचान ही किसी शेफ की वास्तविक और सबसे बड़ी पूंजी होती है।



