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‘भारत-पाकिस्तान सियासी संबंध सुधरने की आशा नहीं’; जावेद अख्तर ने पड़ोसी से रिश्ते पर कही अहम बात

भारतीय फिल्म इंडस्ट्री के 80 वर्षीय दिग्गज और पूर्व राज्यसभा सांसद जावेद अख्तर ने कहा है कि आने वाले कुछ वर्षों में भारत और पाकिस्तान के बीच राजनीतिक संबंधों में सुधार होगा, उन्हें इसकी संभावना बहुत कम दिखती है। उन्होंने अपनी दलील के समर्थन में दक्षिण अफ्रीका की एक घटना का भी जिक्र किया। जावेद अख्तर ने ‘ट्रुथ एंड रीकंसिलिएशन कमीशन’ का उदाहरण देते हुए कहा, भारत और पाकिस्तान ने 1947 में हुए विभाजन के बाद ऐसा कोई प्रयास नहीं किया। दोनों पक्षों के पीड़ितों और शोषण करने वाले अपराधियों को एक मंच पर नहीं लाया जा सका। जावेद अख्तर ने कहा कि अगर 1950 के दशक में भारत और पाकिस्तान की सरकारें दोनों देशों के शरणार्थियों को मिलकर अनुभव साझा करने का मौका देतीं, तो एक-दूसरे की दर्द-पीड़ा बेहतर तरीके से समझी जा सकती थी। उन्होंने कहा कि मौका निकल चुका है। अब 75 साल बाद उस दौर के साक्षी रहे अधिकतर लोग अब जीवित ही नहीं हैं। पड़ोसी देश में एक कार्यक्रम के दौरान सवाल किए जाने पर उन्हें बेबाकी से जवाब दे चुके जावेद अख्तर ने आम जनता के रुख पर भी बात की। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में आज भी करोड़ों लोग भारत से बेहतर संबंध चाहते हैं। इसका कारण केवल आपसी सद्भाव नहीं है।

पड़ोसी देश की सेना-सियासत और चरमपंथी ताकतें रोड़ा…
भारत की तरक्की, कॉर्पोरेट क्षेत्र, सिनेमा, व्यापार, आईटी और रिसर्च जैसे क्षेत्र पाकिस्तान के लोगों के बीच भी आकर्षण का केंद्र हैं। हालांकि, पाकिस्तान की सेना के साथ-साथ देश की राजनीतिक व्यवस्था और पड़ोसी देश की चरमपंथी ताकतें आम जनता के रिश्तों के रास्ते में रोड़ा बनी हुई हैं। ऑपरेशन सिंदूर के बाद उपजे हालात और पाकिस्तान के प्रति भारत के राजनीतिक और सैन्य रवैये को लेकर जावेद अख्तर ने कहा, हमने कई बार रिश्तों को सुधारने की कोशिश की है, लेकिन पाकिस्तान ने कभी वैसा ही प्रयास नहीं किया। भारतीय सेना ‘पेशेवर’ होने के साथ-साथ गैर-राजनीतिक है, जबकि पाकिस्तान की सेना देश की राजनीति में दखल देती है।
भारत की तरक्की, कॉर्पोरेट क्षेत्र, सिनेमा, व्यापार, आईटी और रिसर्च जैसे क्षेत्र पाकिस्तान के लोगों के बीच भी आकर्षण का केंद्र हैं। हालांकि, पाकिस्तान की सेना के साथ-साथ देश की राजनीतिक व्यवस्था और पड़ोसी देश की चरमपंथी ताकतें आम जनता के रिश्तों के रास्ते में रोड़ा बनी हुई हैं। ऑपरेशन सिंदूर के बाद उपजे हालात और पाकिस्तान के प्रति भारत के राजनीतिक और सैन्य रवैये को लेकर जावेद अख्तर ने कहा, हमने कई बार रिश्तों को सुधारने की कोशिश की है, लेकिन पाकिस्तान ने कभी वैसा ही प्रयास नहीं किया। भारतीय सेना ‘पेशेवर’ होने के साथ-साथ गैर-राजनीतिक है, जबकि पाकिस्तान की सेना देश की राजनीति में दखल देती है।
कश्मीर जैसे संवेदनशील मुद्दे के बावजूद भारत ने कभी आक्रामक तेवर नहीं दिखाए
पड़ोसी देश की विचारधारा और भारत की नीति को लेकर जावेद अख्तर ने यह भी कहा कि कश्मीर जैसे मुद्दों पर विवाद रहने के बावजूद भारत ने कभी आक्रामक रुख नहीं अपनाया। लोगों की शिकायतें रही हैं कि भारत ने पर्याप्त सख्ती नहीं दिखाई, लेकिन भारत का रुख हमेशा संयमित रहा है। बता दें कि जावेद अख्तर ने पाकिस्तान के साथ संबंधों को लेकर जिस कार्यक्रम में टिप्पणियां कीं, इसमें फिल्म समीक्षक और लेखिका भावना सोमैया की पुस्तक “फेयरवेल कराची” का विमोचन भी किया गया। कार्यक्रम में जावेद अख्तर की पत्नी और अभिनेत्री शबाना आज़मी भी मौजूद रहीं।
पड़ोसी देश की विचारधारा और भारत की नीति को लेकर जावेद अख्तर ने यह भी कहा कि कश्मीर जैसे मुद्दों पर विवाद रहने के बावजूद भारत ने कभी आक्रामक रुख नहीं अपनाया। लोगों की शिकायतें रही हैं कि भारत ने पर्याप्त सख्ती नहीं दिखाई, लेकिन भारत का रुख हमेशा संयमित रहा है। बता दें कि जावेद अख्तर ने पाकिस्तान के साथ संबंधों को लेकर जिस कार्यक्रम में टिप्पणियां कीं, इसमें फिल्म समीक्षक और लेखिका भावना सोमैया की पुस्तक “फेयरवेल कराची” का विमोचन भी किया गया। कार्यक्रम में जावेद अख्तर की पत्नी और अभिनेत्री शबाना आज़मी भी मौजूद रहीं।
पहलगाम आतंकी हमले के बाद ऑपरेशन सिंदूर… अब दोनों देशों के रिश्ते तनावपूर्ण
बीते 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए कायराना आतंकी हमले में 26 पर्यटकों की नृशंस हत्या की गई। दहशतगर्दों ने धार्मिक पहचान कर केवल पुरुषों को मौत के घाट उतारा। सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की साजिश के बीज पाकिस्तानी सेना के प्रमुख और अब फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के उस भाषण में छिपे हैं, जिसमें उन्होंने जमकर जहर उगला और कश्मीर को पाकिस्तान का हिस्सा बताने की हिमाकत की। आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoK) में मौजूद नौ आतंकी ठिकानों को नेस्तनाबूद कर दिया। भारतीय सेना ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत सटीक जवाबी कार्रवाई की। इसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया।
बीते 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए कायराना आतंकी हमले में 26 पर्यटकों की नृशंस हत्या की गई। दहशतगर्दों ने धार्मिक पहचान कर केवल पुरुषों को मौत के घाट उतारा। सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की साजिश के बीज पाकिस्तानी सेना के प्रमुख और अब फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के उस भाषण में छिपे हैं, जिसमें उन्होंने जमकर जहर उगला और कश्मीर को पाकिस्तान का हिस्सा बताने की हिमाकत की। आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoK) में मौजूद नौ आतंकी ठिकानों को नेस्तनाबूद कर दिया। भारतीय सेना ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत सटीक जवाबी कार्रवाई की। इसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया।



