भारत–चीन विमान सेवा बहाल; रिश्तों में गर्माहट, अवसरों का दायरा हुआ विस्तृत
बेहतर संपर्क से व्यापार और पर्यटन को सीधा लाभ

सीताराम मेवाती
लगभग पांच वर्ष के अंतराल के बाद भारत और चीन के बीच सीधी हवाई सेवाएं दोबारा शुरू हो गई हैं। इंडिगो की पहली उड़ान रविवार रात कोलकाता से ग्वांगझू के लिए रवाना हुई, जिसके साथ 2020 की शुरुआत से बंद पड़ी निर्बाध हवाई कनेक्टिविटी आधिकारिक रूप से बहाल हो गई।
इंडिगो इस मार्ग का दैनिक संचालन एयरबस A320 विमान से करेगी। इसके अतिरिक्त 10 नवंबर से दिल्ली–ग्वांगझू सेवा भी शुरू होगी। वहीं चीन की सरकारी विमान सेवा कंपनी ‘चाइना ईस्टर्न एयरलाइंस’ 9 नवंबर से शंघाई–दिल्ली उड़ान सप्ताह में तीन दिन एयरबस A330-200 से शुरू कर रही है।
अधिकारियों का कहना है कि इन उड़ानों की बहाली से कारोबार, पर्यटन, छात्रों के आवागमन और लोगों के बीच सीधे संपर्क को नई गति मिलेगी, जो लंबे समय से प्रभावित थे। कूटनीतिक विश्लेषक भी इसे द्विपक्षीय संवाद और व्यापार स्थिरता की दिशा में सकारात्मक संकेत मान रहे हैं।
उद्योग जगत का अनुमान है कि आने वाले महीनों में और भी मार्ग बहाल हो सकते हैं, जिनमें एयर इंडिया की दिल्ली–शंघाई उड़ान की संभावित वापसी भी शामिल है। इससे महामारी-पूर्व के लगभग पूरे हवाई गलियारे की पुनर्स्थापना हो जाएगी।
चीन के दूतावास की प्रवक्ता यू जिंग ने ‘एक्स’ पर लिखा, “भारत और चीन के बीच सीधी उड़ानें अब वास्तविकता हैं। कोलकाता–ग्वांगझू मार्ग शुरू हो चुका है, और 9 नवंबर से शंघाई–नई दिल्ली उड़ानें भी सप्ताह में तीन दिन चलेंगी।”
विशाल कमल जैन, जो चीन के हांगझोउ प्रांत में पिछले 23 वर्षों से बसे प्रसिद्ध भारतीय उद्यमी हैं, उन्होंने मुंबई तरंग से बातचीत में कहा कि “यह केवल उड़ानों की बहाली नहीं, बल्कि संबंधों के सेतु का पुनर्निर्माण है। सीधी हवाई सेवा से विश्वास मजबूत होगा, कारोबार में गति आएगी और लोगों के बीच संपर्क विस्तृत होगा। भारत और चीन दुनिया की दो सबसे बड़ी जनसंख्या वाले देश हैं; ऐसे में गहरा आर्थिक सहयोग दोनों अर्थव्यवस्थाओं को नई ऊंचाई तक ले जा सकता है। आने वाले समय में व्यापार के साथ पर्यटन भी एक मजबूत आर्थिक चालक के रूप में उभरेगा, जिससे सांस्कृतिक संवाद और आपसी भरोसा और अधिक सुदृढ़ होगा, और निवेश के नए अवसरों के द्वार खुलेंगे।’”



