Latest newsUncategorized
भारत-चीन रूट पर एयर इंडिया की होगी वापसी, 16 घंटे की जगह 6 घंटे में होगा सफर, किराया भी होगा आधा

भारत से चीन के बीच सीधी फ्लाइट शुरू हो गई है। इसके बाद अब एयर इंडिया भी अपने यात्रियों के लिए एक बड़ी सुविधा लेकर आ रही है। नई योजना के तहत दिल्ली से शंघाई की यात्रा अब सिर्फ 6 घंटे में पूरी हो सकेगी, जबकि अभी इस रूट पर 16 से 20 घंटे तक का समय लग जाता है। एयरलाइन कंपनी की इस नई पहल का सीधा फायदा किरायों पर भी पड़ेगा। नॉन-स्टॉप डायरेक्ट फ्लाइट शुरू होने के बाद दिल्ली-शंघाई रूट का किराया लगभग आधा रह जाएगा। एयर इंडिया की यह नई डायरेक्ट सेवा दोनों शहरों के बीच यात्रा को तेज और काफी सस्ता बना देगी। जानकारी के अनुसार, एयर इंडिया 1 फरवरी 2026 से दिल्ली-शंघाई डायरेक्ट फ्लाइट की सेवा शुरू करने की तैयारी में है। इस नई उड़ान के साथ एयर इंडिया लगभग छह साल बाद चीन में अपनी वापसी करेगी। अक्टूबर में भारत–चीन के बीच डायरेक्ट फ्लाइट्स बहाल होने के बाद, एयर इंडिया तीसरी ऐसी एयरलाइन बन जाएगी जो दोनों देशों के बीच नॉन-स्टॉप सेवा देगी। इससे पहले इंडिगो और चीन की कंपनी चाइना ईस्टर्न इस रूट पर उड़ानें शुरू कर चुकी हैं। एयर इंडिया दिल्ली–शंघाई मार्ग पर सप्ताह में चार डायरेक्ट उड़ानें संचालित करेगी। इसके लिए एयरलाइन बोइंग 787-8 विमान का इस्तेमाल करेगी। हाल ही में भारत–चीन रूट पर इंडिगो ने सबसे पहले अक्टूबर के अंत में कोलकाता–गुआंगझोउ उड़ान शुरू की थी। इसके बाद इसी महीने उसने दिल्ली–गुआंगझोउ की डायरेक्ट सेवा भी लॉन्च की। दूसरी ओर, चाइना ईस्टर्न पहले ही दिल्ली–शंघाई सीधी उड़ान शुरू कर चुकी है। कोविड-19 महामारी की शुरुआत में भारत और चीन के बीच सभी डायरेक्ट फ्लाइट्स बंद कर दी गई थीं। इसके बाद गलवान घाटी विवाद के कारण रिश्तों में तनाव बढ़ा और उड़ान सेवाएं दोबारा शुरू नहीं हो सकीं। पिछले पांच वर्षों में यात्रियों को चीन पहुँचने के लिए सिंगापुर, बैंकॉक, कुआलालंपुर, हॉन्गकॉन्ग या दोहा जैसे देशों के जरिए लंबा सफर करना पड़ता था। नतीजा यह हुआ कि किराया 80 हजार से बढ़कर 1.5 लाख रुपये तक पहुंच गया और यात्रा का समय 16 से 18 घंटे तक हो जाता था। अब नई डायरेक्ट फ्लाइट शुरू होने से उम्मीद है कि किराया लगभग आधा हो जाएगा और दिल्ली–शंघाई का सफर सिर्फ छह घंटे में पूरा हो सकेगा। दोनों देश के बीच यात्रियों की संख्या हमेशा से अच्छी रहती है। 2019 में जब सीधी उड़ानें थीं तब 12 लाख से ज्यादा लोग इन उड़ानों से सफर करते थे। अगर दूसरे रूट के उड़ानों को जोड़ा जाए, तो ये संख्या 19 लाख तक पहुंच जाती थी। विश्लेषकों का कहना है कि, अगर दोनों देशों के बीच वीजा नियम आसान होते हैं, तो यात्रियों की संख्या में और इजाफा हो सकता है।
अभी इंडिगो ने शुरू की है चीन के लिए सीधी सेवा
इसी वर्ष अगस्त–सितंबर के दौरान भारत और चीन के संबंधों में सुधार देखा गया है। शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सात साल बाद चीन पहुंचे। वहां पीएम की मुलाकात राष्ट्रपति शी चिनफिंग से हुई। यह मुलाकात दोनों देशों के बीच हालिया कूटनीतिक गर्माहट का संकेत मानी जा रही है। 31 अगस्त को त्येनजिन में राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि, सीधी उड़ानों की बहाली पर विचार चल रहा है। गलवान झड़प के बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया था, जिसके चलते उड़ानें बंद हो गई थीं। सीधी उड़ान सेवा फिर से शुरू होना दोनों देशों के बीच रिश्तों को सामान्य करने की दिशा में बड़ा कदम बताया जा रहा है। इंडिगो एयरलाइंस ने 26 अक्टूबर 2025 से कोलकाता से चीन के गुआंगज़ौ के बीच सीधी उड़ान सेवा शुरू की है। इसके अलावा इंडिगो ने 10 नवंबर 2025 को दिल्ली से चीन के गुआंगज़ौ के बीच भी एक विमान सेवा शुरु की है।
इसी वर्ष अगस्त–सितंबर के दौरान भारत और चीन के संबंधों में सुधार देखा गया है। शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सात साल बाद चीन पहुंचे। वहां पीएम की मुलाकात राष्ट्रपति शी चिनफिंग से हुई। यह मुलाकात दोनों देशों के बीच हालिया कूटनीतिक गर्माहट का संकेत मानी जा रही है। 31 अगस्त को त्येनजिन में राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि, सीधी उड़ानों की बहाली पर विचार चल रहा है। गलवान झड़प के बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया था, जिसके चलते उड़ानें बंद हो गई थीं। सीधी उड़ान सेवा फिर से शुरू होना दोनों देशों के बीच रिश्तों को सामान्य करने की दिशा में बड़ा कदम बताया जा रहा है। इंडिगो एयरलाइंस ने 26 अक्टूबर 2025 से कोलकाता से चीन के गुआंगज़ौ के बीच सीधी उड़ान सेवा शुरू की है। इसके अलावा इंडिगो ने 10 नवंबर 2025 को दिल्ली से चीन के गुआंगज़ौ के बीच भी एक विमान सेवा शुरु की है।
चीनी कंपनियां भी भारत में एंट्री की कर रही तैयारी
इस बीच दो चीनी एयरलाइन कंपनियां भी जल्द ही भारत के लिए अपनी उड़ान सेवाएं शुरू करने की तैयारी में हैं। सुपर्णा एयरलाइंस और जिआंगसू जिंगडोंग कार्गो एयरलाइंस ने भारत–चीन रूट पर ऑपरेशन शुरू करने के लिए केंद्र सरकार से औपचारिक संपर्क किया है। सूत्रों का कहना है कि, चीनी एयरलाइन कंपनी सुपर्णा एयरलाइंस के साथ जिआंगसू जिंगडोंग कार्गो एयरलाइंस ने भी भारत–चीन रूट पर सेवाएं शुरू करने के लिए भारत सरकार के पास आवेदन किया है। जिआंगसू जिंगडोंग कार्गो एयरलाइंस का कार्गो सेवाएं शुरू करने का विचार कर रही है। जबकि सुपर्णा एयरलाइंस पैसेंजर उड़ानें संचालित करना चाहती है या केवल मालवाहक सेवाओं के लिए आवेदन कर रही है, अभी साफ नहीं हैं। भारत और चीन के बीच यात्रियों की संख्या हमेशा से अच्छी रहती है। 2019 में जब सीधी उड़ानें थीं तब 12 लाख से ज्यादा लोग इन उड़ानों से सफर करते थे। अगर दूसरे रूट के उड़ानों को जोड़ा जाए, तो ये संख्या 19 लाख तक पहुंच जाती थी। वहीं, जब सीधी उड़ान सेवा बंद थी तब 5.72 लाख यात्री सिंगापुर, हांगकांग, बैंकॉक और वियतनाम से चीन तक का सफर तय करते थे। ये रास्ता न केवल लंबा होता था बल्कि महंगा भी होता है। ऐसे में सीधी उड़ानें शुरू होने से यात्रियों को समय और पैसे दोनों की बचत होगी। विश्लेषकों का कहना है कि, अगर दोनों देशों के बीच वीजा नियम आसान होते हैं, तो यात्रियों की संख्या में और इजाफा हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि, भारत-चीन के बीच अब रिश्ते सामान्य हो रहे है। लेकिन 2019-20 के मुकाबले 2025 की विमानन क्षेत्र की तस्वीर पूरी तरह से बदल चुकी है। पहले एयर इंडिया सरकार के अधीन थी। लेकिन अब टाटा समूह जैसी महत्वपूर्ण कंपनी ने इसे टेक ओवर कर लिया है। इंडिगो एयरलाइन ने 1,800 से ज्यादा विमानों का ऑर्डर दे रखा है। इनमें लंबी दूरी का सफर तय करने वाले कई विमान शामिल है। यह दोनों ही विमानन कंपनियां दिल्ली और मुंबई को अंतरराष्ट्रीय अब बनाना चाहती है। इस दृष्टिकोण से चीन का बाजार अहम है। भारतीय एयरलाइंस चीन के चार बड़े शहर बीजिंग, शंघाई, ग्वांगझोउ और चेंगदू को टारगेट कर रही हैं। इन शहरों में व्यापार और पर्यटन की जबरदस्त संभावनाएं हैं।
इस बीच दो चीनी एयरलाइन कंपनियां भी जल्द ही भारत के लिए अपनी उड़ान सेवाएं शुरू करने की तैयारी में हैं। सुपर्णा एयरलाइंस और जिआंगसू जिंगडोंग कार्गो एयरलाइंस ने भारत–चीन रूट पर ऑपरेशन शुरू करने के लिए केंद्र सरकार से औपचारिक संपर्क किया है। सूत्रों का कहना है कि, चीनी एयरलाइन कंपनी सुपर्णा एयरलाइंस के साथ जिआंगसू जिंगडोंग कार्गो एयरलाइंस ने भी भारत–चीन रूट पर सेवाएं शुरू करने के लिए भारत सरकार के पास आवेदन किया है। जिआंगसू जिंगडोंग कार्गो एयरलाइंस का कार्गो सेवाएं शुरू करने का विचार कर रही है। जबकि सुपर्णा एयरलाइंस पैसेंजर उड़ानें संचालित करना चाहती है या केवल मालवाहक सेवाओं के लिए आवेदन कर रही है, अभी साफ नहीं हैं। भारत और चीन के बीच यात्रियों की संख्या हमेशा से अच्छी रहती है। 2019 में जब सीधी उड़ानें थीं तब 12 लाख से ज्यादा लोग इन उड़ानों से सफर करते थे। अगर दूसरे रूट के उड़ानों को जोड़ा जाए, तो ये संख्या 19 लाख तक पहुंच जाती थी। वहीं, जब सीधी उड़ान सेवा बंद थी तब 5.72 लाख यात्री सिंगापुर, हांगकांग, बैंकॉक और वियतनाम से चीन तक का सफर तय करते थे। ये रास्ता न केवल लंबा होता था बल्कि महंगा भी होता है। ऐसे में सीधी उड़ानें शुरू होने से यात्रियों को समय और पैसे दोनों की बचत होगी। विश्लेषकों का कहना है कि, अगर दोनों देशों के बीच वीजा नियम आसान होते हैं, तो यात्रियों की संख्या में और इजाफा हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि, भारत-चीन के बीच अब रिश्ते सामान्य हो रहे है। लेकिन 2019-20 के मुकाबले 2025 की विमानन क्षेत्र की तस्वीर पूरी तरह से बदल चुकी है। पहले एयर इंडिया सरकार के अधीन थी। लेकिन अब टाटा समूह जैसी महत्वपूर्ण कंपनी ने इसे टेक ओवर कर लिया है। इंडिगो एयरलाइन ने 1,800 से ज्यादा विमानों का ऑर्डर दे रखा है। इनमें लंबी दूरी का सफर तय करने वाले कई विमान शामिल है। यह दोनों ही विमानन कंपनियां दिल्ली और मुंबई को अंतरराष्ट्रीय अब बनाना चाहती है। इस दृष्टिकोण से चीन का बाजार अहम है। भारतीय एयरलाइंस चीन के चार बड़े शहर बीजिंग, शंघाई, ग्वांगझोउ और चेंगदू को टारगेट कर रही हैं। इन शहरों में व्यापार और पर्यटन की जबरदस्त संभावनाएं हैं।



