छात्रों के लिए खुशखबरी, डीयू में एक वर्षीय स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम और ‘सेमेस्टर अवे प्रोग्राम’ को मंजूरी

अधिकारियों के अनुसार, अकादमिक परिषद ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत तैयार किए गए पीजी कोर्स ढांचे (PGCF 2024) के आधार पर कई विषयों में एक वर्षीय स्नातकोत्तर पाठ्यक्रमों को मंजूरी दे दी है। यह फैसला इसलिए भी लिया गया है क्योंकि विश्वविद्यालय का चार वर्षीय स्नातक कार्यक्रम अब अपने चौथे वर्ष में पहुंच रहा है। इसके साथ ही, परिषद ने छात्रों को स्वयम और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म (MOOCs) के जरिए पढ़ाई करने की भी अनुमति दी है। अब छात्र इन प्लेटफॉर्म से कुल निर्धारित क्रेडिट का 5 प्रतिशत तक हासिल कर सकेंगे। कई शिक्षकों ने इस फैसले पर आपत्ति जताई और एक पत्र लिखकर कहा कि इससे पढ़ाई पर बड़े असर पड़ सकते हैं। विदेशी विश्वविद्यालयों के साथ मिलकर ‘सेमेस्टर अवे प्रोग्राम’ शुरू करने का प्रस्ताव भी रखा गया, जिसे विरोध के बावजूद पास कर दिया गया। नोट में यह भी बताया गया कि बैठक के दौरान “शून्यकाल” (जब सदस्य अपने मुद्दे उठाते हैं) को अचानक खत्म कर दिया गया। नोट में कहा गया, “बहस को सीमित करने और असहमतिपूर्ण विचारों पर सार्थक चर्चा को रोकने के तरीके से बैठक को आगे बढ़ाने का निर्णय स्थापित लोकतांत्रिक मानदंडों और सामूहिक निर्णय लेने की प्रक्रिया की अवहेलना को दर्शाता है।” निर्वाचित कार्यकारी परिषद सदस्य मोनामी सिन्हा ने बताया कि जब स्वयं और एमओओसी का मुद्दा उठाया गया, तो कुलपति ने अचानक बैठक स्थगित कर दी। “हम असहमति जता रहे थे और बैठक अचानक समाप्त कर दी गई। हमें इस बात की कोई जानकारी नहीं है कि अंत में क्या निर्णय लिया गया,” सिन्हा ने कहा। हालांकि, दिल्ली विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार विकास गुप्ता ने पीटीआई को बताया कि स्वयं और एमओओसी को शुरू करने से संबंधित एजेंडा आइटम कार्यकारी परिषद द्वारा पारित कर दिया गया है और अब इसे कार्यकारी परिषद (EC) की मंजूरी का इंतजार है।



