बढ़ती गर्मी से बदला मधुमक्खियों का जीवन चक्र, खाद्य सुरक्षा पर संकट; घट रही प्रजनन क्षमता

जलवायु परिवर्तन अब केवल मौसम के चक्र को ही नहीं बदल रहा है। यह प्रकृति की मूल संरचना को भी प्रभावित कर रहा है। मधुमक्खियों और ततैयों जैसे महत्वपूर्ण परागणकर्ताओं पर इसका असर बहुत तेजी से सामने आ रहा है। प्रतिष्ठित जर्नल ‘फंक्शनल इकोलॉजी’ में छपे एक अध्ययन के अनुसार, बढ़ते तापमान के कारण ये कीट अपने तय समय से पहले ही शीतनिद्रा से बाहर आ रहे हैं। इस वजह से उन्हें न तो पर्याप्त भोजन मिल पा रहा है और न ही उनके शरीर में जरूरी ऊर्जा बची रहती है। इसके नतीजे में ये कीट कमजोर पड़ रहे हैं। उनकी प्रजनन क्षमता घट रही है और उनके अस्तित्व पर संकट गहराता जा रहा है। आमतौर पर ज्यादातर मधुमक्खियां सर्दियों में जमीन, लकड़ी या अन्य सुरक्षित जगहों पर कोकून के अंदर शीतनिद्रा में रहती हैं। शीतनिद्रा का मतलब है सर्द मौसम में शरीर की गतिविधियों को बहुत धीमा करके ऊर्जा बचाना। कुछ प्रजातियां वसंत की शुरुआत में बाहर आती हैं और वे कोकून में ही पूरी तरह विकसित हो चुकी होती हैं। वहीं कुछ प्रजातियां गर्मियों में सक्रिय होती हैं। उन्हें वसंत में बाहर आने से पहले अपना विकास पूरा करना पड़ता है। लेकिन जलवायु परिवर्तन इस प्राकृतिक चक्र को बिगाड़ रहा है। बढ़ती गर्मी के कारण ये कीट समय से पहले बाहर निकल रहे हैं। इससे उनके सामने जीवित रहने की नई चुनौतियां खड़ी हो रही हैं। अध्ययन बताता है कि जब मधुमक्खियां और ततैये समय से पहले बाहर आते हैं, तब उनके लिए जरूरी फूल अभी खिले नहीं होते। इसका मतलब है कि उन्हें पर्याप्त पराग और अमृत नहीं मिल पाता, जो उनका मुख्य भोजन है। साथ ही, ज्यादा तापमान की वजह से उनके शरीर में जमा वसा (फैट) तेजी से खत्म होने लगती है। इससे उनके पास जीवित रहने, उड़ने और प्रजनन करने के लिए पर्याप्त ताकत नहीं बचती।



