VB G RAM G कानून राज्यों पर डालेगा करोड़ों का अतिरिक्त बोझ? कांग्रेस ने सरकार को घेरा, उठाए कई सवाल

केंद्र सरकार द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की जगह 1 जुलाई से लागू किए जा रहे ‘विकसित भारत- गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम’ को लेकर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस ने नए कानून को लेकर मोदी सरकार पर बड़ा हमला बोला है। पार्टी का आरोप है कि नया कानून ग्रामीण मजदूरों के अधिकारों को कमजोर करेगा और राज्यों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डालेगा। कांग्रेस ने दावा किया कि कई राज्यों ने भी इस नए कानून को लेकर चिंता जताई है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि मोदी सरकार ने बिना व्यापक चर्चा और पर्याप्त परामर्श के मनरेगा को समाप्त करने का फैसला लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि ग्रामीण विकास संबंधी संसदीय स्थायी समिति, राज्य सरकारों और अन्य हितधारकों से इस विषय पर गंभीर चर्चा नहीं की गई। जयराम रमेश ने कहा कि अब जब एक जुलाई से नया कानून लागू होने जा रहा है, तब कई राज्यों ने इसके विभिन्न प्रावधानों पर आपत्ति जताई है।
क्या कृषि सीजन में ब्लैकआउट अवधि पर भी सवाल उठे हैं?
कांग्रेस का दावा है कि चार राज्य सरकारों ने योजना में कृषि के चरम सीजन के दौरान प्रस्तावित ‘ब्लैकआउट अवधि’ का विरोध किया है। पार्टी का कहना है कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में काम और मजदूरी पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा कम से कम पांच राज्यों ने ग्रामीण श्रमिकों की मजदूरी बढ़ाने की मांग भी की है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि नए कानून से ग्रामीण श्रमिकों की मोलभाव करने की क्षमता कमजोर होगी। केंद्र सरकार ने घोषणा की है कि ‘विकसित भारत- गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम’ 1 जुलाई से पूरे देश में लागू होगा। यह दो दशक पुराने मनरेगा की जगह लेगा। नए कानून के तहत ग्रामीण परिवारों को 125 दिनों के वैधानिक मजदूरी रोजगार का प्रावधान किया गया है। हालांकि कांग्रेस का कहना है कि मनरेगा संविधान से प्राप्त काम के अधिकार की गारंटी देता था, जबकि नया कानून केवल केंद्रीकरण और राज्यों पर वित्तीय दबाव बढ़ाने का काम करेगा।



