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अमीर देश 2048 तक सर्वाइकल कैंसर से होंगे मुक्त, भारत जैसे मध्यम आय वाले देशों में भी हो सकता है खत्म

उच्च आय वाले अमीर देश टीकाकरण और बेहतर स्क्रीनिंग के दम पर साल 2048 तक सर्वाइकल कैंसर (गर्भाशय ग्रीवा का कैंसर) को पूरी तरह खत्म करने की राह पर हैं, वहीं निम्न और मध्यम आय वाले देशों में हालत अभी भी चिंताजनक बनी हुई है। इस कैंसर को टीकाकरण और स्क्रीनिंग के जरिये रोका जा सकता है। कनाडा के सीएचयू डी क्यूबेक-यूनिवर्सिटी लावल रिसर्च सेंटर के शोधकर्ताओं सहित विशेषज्ञों की एक टीम ने चेतावनी दी है कि इस अंतर के कारण आने वाले समय में गरीब देशों की महिलाओं को इस बीमारी का कहीं अधिक सामना करना पड़ेगा। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, सर्वाइकल कैंसर के लगभग 99 फीसदी मामले ह्यूमन पेपिलोमावायरस (एचपीवी) के संक्रमण से जुड़े होते हैं। संगठन ने एक लक्ष्य तय किया है कि सर्वाइकल कैंसर की दर प्रति एक लाख महिलाओं में चार से भी कम हो सके। इसके लिए 90-70-90 का फॉर्मूला तय किया गया है, इसमें 90 फीसदी लड़कियों को 15 वर्ष की आयु तक एचपीवी का टीका लग जाए। बढ़ती असमानता और चुनौतियां: अध्ययन में पांच अलग-अलग रणनीतियों का मॉडल तैयार किया गया। इसमें पाया गया कि यदि मौजूदा स्थिति बनी रही, तो गरीब देशों में कैंसर की दर में केवल 23 फीसदी की ही कमी आएगी। शोधकर्ताओं का मानना है कि यदि इन देशों में 90 फीसदी टीकाकरण का लक्ष्य हासिल कर लिया जाए, तो उप-सहारा अफ्रीका को छोड़कर बाकी गरीब देशों में भी इसे खत्म किया जा सकता है।

कैंसर मुक्त भारत की ओर बढ़ते कदम
भारत के संदर्भ में लैंसेट ऑन्कोलॉजी के एक पिछले अध्ययन (सितंबर 2022) ने सकारात्मक संकेत दिए थे। इसके अनुसार, यदि भारत में 90 फीसदी कवरेज के साथ एकल-खुराक टीकाकरण प्रभावी रूप से लागू किया जाता है, तो कैंसर के मामलों में 78 फीसदी तक की कमी आ सकती है। क्या कहते हैं विशेषज्ञ : विशेषज्ञों का कहना है कि कम लागत वाले टीके, सिंगल-डोज वैक्सीन और लड़कों को भी टीकाकरण अभियान में शामिल करने जैसे कदम इस वैश्विक लड़ाई को आसान बना सकते हैं। शोध में कहा गया है कि टीकाकरण और नियमित जांच के माध्यम से कैंसर को रोक सकते हैं।

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